
निहारिका(नेहा)
भगवान् तुम कभी अगर स्कूल गए होते.
भगवान् तुम कभी अगर स्कूल गए होते,
श्रृष्टि को रचना ही भूल गए होते!
आध मन का होता गर तुम्हारा बस्ता,
ढाई कोस होता घुमाव-दार रस्ता,
पाँव सूज-कर पूरे फूल गए होते...
आए-रोज होती आपकी परीक्षा,
कुछ भी करने की होती ना इच्छा ,
होम-वर्क के फंदे से झूल रहे होते....
कर्म ही पूजा है उपदेश ये सुनाते,
आती याद नानी जो पाठशाला जाते,
लगता ये वचन फ़िर फिजूल कहे होते...
करना जो पड़ता तुमको होम-वर्क सारा,
बे-वजह चढ़ता टीचर्स का पारा ,
पीठ पर डंडों के शूल सहे होते...
भगवान् तुम कभी अगर स्कूल गए होते.....
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( ये रचना मेरी छोटी बिटिया नेहा के आग्रह पर आनन् -फानन मैं लिखी गई है क्यूंकि उसे स्कूल मैं ताज़ी रचना सुनानी थी और समय कम था इसलिए ये उन बच्चों को समर्पित है जो स्कूल जाती बार तो उदास हो जाते हैं लेकिन वापिस घर लौटती बार चहक रहे होते हैं!काश ऐसा होता कि बच्चे रोज खुशी-खुशी स्कूल जाते)
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bahut pyari si rachna ki aap ne . bachchn ki vyahta ko khoob kahaa. Badhai ho.
ReplyDeletehonsla-fajai k lea dhanyavaad prem ji...
ReplyDeleteबहुत अच्छा लिखा है आपने .बधाई
ReplyDeleteदिलचस्प ओर शानदार.......भगवान् तुम गर स्कूल गए होते ...क्या बात है .....नन्ही बहुत प्यारी है ...कहते है जब आप पिता बनते है कुछ ऐसे ख्यालो से गुजरते है जिनसे पहले नहीं गुजरे....
ReplyDeleteअमर भाई
ReplyDeleteकविता तो लिख डाली आपने
पर प्रतियोगिता में नहीं भिजवाई
अभी भी समय है भाई
आज रात के 12 बजे तक
भेज सकते हो
पता है avinashvachaspati@gmail.com
या tetaalaaa@gmail.com पर
तब तक तो और भी सुधार सकते हो
धार इसकी कर सकते हो और तेज
अब तो अवश्य रहे होगे भेज
यहां पोस्ट तो सजा दी
पर प्रतियोगिता में नहीं भेजी
कोई नाराजगी तो नहीं है बंधु
एक राह के पथिक हैं हम सब
मिल जुलकर आगे बढ़ेंगे अब।
बहुत शानदार, क्या हालत है शिक्षा की । सटीक चित्रण ।
ReplyDeletebahut pyara likhte hain aap
ReplyDeletenice
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना रची है बिटिया ने. मेरी तरफ से बधाई कहें और अनेक शुभकामनाएँ. बहुत संभावनायें दिख रही हैं बिटिया की लेखनी में.
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